चेन्नई: PM मोदी अन्ना विश्वविद्यालय के 42वें दीक्षांत समारोह में हुए शामिल, 69 मेधावियों को गोल्ड मेडल से नवाजा

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शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चेन्नई में अन्ना विश्वविद्यालय के 42वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि और सीएम एमके स्टालिन भी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ मौजूद रहे। दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने 69 मेधावी छात्र छात्राओं को स्वर्ण पदक और प्रमाणपत्र प्रदान किया। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक संबोधन में कहा कि, अन्ना विश्वविद्यालय के 42वें दीक्षांत समारोह में आज स्नातक करने वाले सभी लोगों को बधाई। आपने अपने दिमाग में पहले से ही अपने लिए एक भविष्य बना लिया होगा। इसलिए आज का दिन केवल उपलब्धियों का ही नहीं बल्कि आकांक्षाओं का भी है।

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी एक अभूतपूर्व घटना थी। यह सदी में एक बार आने वाला संकट था। इस वैश्विक संकट ने दुनिया के हर देश की परीक्षा ली। उन्होंने आगे कहा, जैसा कि आप जानते हैं, विपत्तियां बताती हैं कि हम किस चीज से बने हैं। अपने वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य पेशेवरों और आम लोगों की बदौलत भारत ने आत्मविश्वास से अज्ञात दुश्मन का सामना किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पिछले वर्ष भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया। नवाचार जीवन का एक तरीका बनता जा रहा है। पिछले 6 वर्षों में, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या में 15,000 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2016 में सिर्फ 470 से, इनकी संख्या अब लगभग 73,000 है। जब उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में देश अच्छा करते हैं, तो निवेश आता है। पिछले साल भारत को 83 बिलियन डॉलर से अधिक का रिकॉर्ड एफडीआई प्राप्त हुआ। हमारे स्टार्ट.अप्स को भी महामारी के बाद रिकॉर्ड फंडिंग मिली। इन सबसे ऊपर, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत अब तक की सबसे अच्छी स्थिति में है।

पीएम मोदी ने कहा, तकनीक आधारित इस युग में आपके पक्ष में 3 महत्वपूर्ण कारक हैं। पहला कारक यह है कि प्रौद्योगिकी के लिए एक सकारात्मक माहौल है। प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ चीजें आसान हो रही हैं। गरीब से गरीब व्यक्ति भी इसे अपना रहा है। दूसरा कारक जोखिम लेने वालों में विश्वास की भावना है। पहले सामाजिक अवसरों पर एक नौजवान के लिए यह कहना मुश्किल था कि वह एक उद्यमी है। लोग उन्हें सेटल होने यानी वेतनभोगी नौकरी पाने के लिए कहते थे। अब स्थिति विपरीत है। तीसरा कारक सुधार का एक स्वभाव बन जाना। पहले, एक धारणा थी कि एक मजबूत सरकार का मतलब है कि उसे सब कुछ और सभी को नियंत्रित करना चाहिए। एक मजबूत सरकार सब कुछ या सभी को नियंत्रित नहीं करती है। वह चीजों में सिस्टम के हस्तक्षेप करने की आदत को नियंत्रित करती है। एक मजबूत सरकार प्रतिबंधात्मक नहीं है, लेकिन उत्तरदायी होती है। एक मजबूत सरकार हर क्षेत्र में नहीं चलती है, वह खुद को सीमित करती है और लोगों की प्रतिभा के लिए जगह बनाती है।

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