सावन मास 2022: सावन के पहले सोमवार पर इस मुहूर्त में शिवलिंग का करें अभिषेक

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आज सावन मास का पहला सोमवार है। महादेव की आराधना के इस महापर्व पर आज शिवभक्‍त भक्ति में रमेंगे। जैसा कि हमें ज्ञात है कि भगवान शिव को बिल्‍व पत्र प्रिय है। इसके अलावा भक्‍त गण कंद, दूध, दही, घी, शहद, शकर आदि से भी शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। लेकिन इसके साथ ही एक और महत्‍वपूर्ण वस्‍तु है जिसे यदि आपने शिवलिंग को अर्पित किया तो महादेव की कृपा आप पर बरसेगी। यह वस्‍तु है रुद्राक्ष। आइये समझते हैं कि यह क्‍या है और इसका अध्‍यात्मिक महत्‍व क्‍या है।भगवान शिव को रूद्राक्ष चढ़ाने का समय
सावन के पहले सोमवार पर आप तय मुहूर्त में शिवलिंग को रूद्राक्ष अर्पित करें तो ठीक रहेगा। सुबह 04 बजकर 13 मिनट से लेकर 04 बजकर 54 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त था। इसके बाद दोपहर 12 बजे से 12.55 तक अभिजीत मुहूर्त का समय रहेगा। इसके बाद दोपहर 02.45 से 03:40 तक विजय मुहूर्त बनेगा। इस बीच आप किसी भी समय शिवलिंग पर रूद्राक्ष चढ़ा सकते हैं।

रुद्राक्ष की उत्पत्ति
रुद्राक्ष को हिंदू धर्म में शुभ माना जाता है। किंवदंती है कि रुद्राक्ष भगवान शंकर के आंसुओं से बनाया गया था। तो भगवान शंकर और रुद्राक्ष के बीच एक संबंध है। रुद्राक्ष को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन कई जगहों पर रुद्राक्ष को शंकर के आंसुओं से बनाया गया माना जाता है। वास्तुशास्त्र में भी रुद्राक्ष का महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रुद्राक्ष घर में सकारात्मक माहौल बनाता है।

भगवान शंकर के आंसुओं से रुद्राक्ष की रचना
पौराणिक कथाओं के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर के आंसुओं से हुई थी। रुद्राक्ष और भगवान शंकर का अटूट संबंध है। देवी भागवत पुराण के अनुसार त्रिपुरासुर नाम का एक राक्षस ऋषियों को परेशान कर रहा था। ऋषि त्रिपुरासुर राक्षस की परेशानी को समाप्त करने के लिए भगवान शंकर के पास पहुंचे। उनका दु:ख सुनकर भगवान शंकर सो गए, जब वे जागे तो उनकी आंखों से आंसू गिरे और उनमें से कुछ बूंदें धरती पर गिरीं। कहा जाता है कि रुद्राक्ष इन्हीं अश्रुओं से बना है।

क्‍या होता है रूद्राक्ष
रुद्राक्ष का अर्थ है भगवान शिव और उनकी आंखें। कहा जाता है कि जहां भगवान शंकर के आंसू धरती पर गिरे वहीं रुद्राक्ष का पौधा उग आया। इसलिए रुद्राक्ष भगवान शंकर को बहुत प्रिय है। कहा जाता है कि अगर रुद्राक्ष को गले में धारण कर भगवान शंकर की पूजा की जाए तो भगवान शंकर जल्दी प्रसन्न होते हैं।

रुद्राक्ष धारण करें और भगवान शंकर की पूजा करें
रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से बनाया गया था, इसलिए रुद्राक्ष भगवान शिव को बहुत प्रिय है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यदि आप रुद्राक्ष धारण कर भगवान शंकर की पूजा करते हैं तो भगवान शंकर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। रुद्राक्ष कई रूपों में उपलब्ध हैं लेकिन एक मुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का रूप माना जाता है। एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से भी भगवान शंकर और सूर्य की कृपा प्राप्त होती है।….naidunia

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