विश्व बाघ दिवस: जानें भारत में टाइगर्स की क्या है स्थिति

WhatsApp Image 2022-07-29 at 9.54.47 AM
Share

आज पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मना रहा है। इस दिवस की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। इस वर्ष 12वां अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस है। हर साल 29 जुलाई को बाघ की घटती आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण के प्रयासों के लिए मनाया जाता है।

WWF विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 100 सालों में दुनिया-भर में लगभग 97 फीसदी जंगली बाघों आबादी घट गई है। एक सदी पहले लगभग 100,000 बाघों की तुलना में वर्तमान में केवल 3,000 बाघ जीवित हैं। सरकार ने बताया कि भारत में पिछले तीन साल में 329 बाघों की मौत शिकार, प्राकृतिक और अप्राकृतिक कारणों से हो गयी। केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने 26 जुलाई को लोकसभा में जानकारी दी थी कि बीते तीन वर्षो में शिकार, बिजली का करंट लगने, जहरीले पदार्थ का सेवन करने और ट्रेन हादसों की वजह से 307 हाथियों की मृत्यु हो गयी।

सरकार के अनुसार, 2019 में 96 बाघों की मौत हो गयी। 2020 में 106 तथा 2021 में 127 बाघ मारे गये। चौबे के अनुसार इनमें 68 बाघ प्राकृतिक कारणों से, पांच अप्राकृतिक कारणों से और 29 बाघ शिकारियों के हमलों में मारे गये। मंत्री के जवाब में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार शिकार के मामलों की संख्या में कमी आई है, जो 2019 में 17 से 2021 में घटकर चार रह गयी है। आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में बाघों के हमलों में 125 लोग मारे गये, जिनमें 61 महाराष्ट्र में और 25 उत्तर प्रदेश में मारे गए।

बाघ की आबादी में गिरावट के लिए कौन हैं जिम्मेदार
IUCN रेड सूची के अनुसार, बाघ एक लुप्तप्राय जानवर के रूप में सूचीबद्ध है। इस प्रजाति के सामने आने वाले प्रमुख खतरे हैं अवैध शिकार, निवास स्थान का विनाश, अपर्याप्त शिकार इत्यादि हैं। बाघों को उनकी खाल, हड्डियों और मांस के लिए भी मार दिया जाता है। इसलिए भी बाघों की संख्या में गिरावट आई है।

बाघों की विभिन्न प्रजातियां
बाघ अलग-अलग रंगों के होते हैं, जैसे सफेद बाघ, काली धारियों वाला सफेद बाघ, काली धारियों वाला भूरा बाघ और गोल्डन टाइगर, लेकिन इनमें भी कई प्रजातियां पाई जाती है। इनमें साइबेरियाई बाघ, बंगाल बाघ, इंडोचाइनीज बाघ, मलय बाघ और दक्षिण चीन बाघ शामिल है। बंगाल टाइगर मुख्य रूप से भारत में पाए जाते हैं, जिनकी आबादी बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, चीन और म्यांमार में भी कम है। यह बाघ की सभी उप-प्रजातियों में सबसे अधिक है, जिसमें 2,500 से अधिक जंगल में बचे हैं। वहीं अब बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर, जावन टाइगर और टाइगर हाइब्रिड ऐसी प्रजातियां हैं जो विलुप्त हो चुकी हैं।

Leave a comment